वसंत पंचमी का क्या है महत्व ? मुहर्त व पर्व मनाने के तौर तरीकें

वसंत पंचमी (Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna) भारत में मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है जिसको श्री पंचमी भी कहा जाता है, और जैसा की नाम से ही प्रतीति होता है कि वसंत पंचमी हिन्दू त्यौहार होने के कारण सारी दुनिया में जहाँ जहाँ भी हिन्दू संस्कृति निवास करती है  हिन्दुओ के द्वारा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यहाँ हम  वसंत पंचमी पर निबंध के माध्यम से सम्पूर्ण जानकारी शुभ मुहूर्त व विधि विधान की चर्चा करेंगे.

भारत के पूर्वी हिस्सों में वसतं पंचमी के दिन माँ सरस्वती की मूर्ति को विधि विधान से स्थापित किया जाता है व देवी सरस्वती की पूजा अर्चना  करते हैं. अगले दिन मूर्ति को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है.

बसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्त्व | Basant Panchmi Aur Peele Rang Ka Mahatv

मुख्य बिंदु सरसरी नजर से hide
3. पूरा वर्ष या साल भारत की नजर से | Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna
3.3. वसंत पंचमी और माँ सरस्वती एक अद्भूत बेला | Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna Ki Bela 16 February 2021

वसंत पंचमी पर पीले रंग की बड़ी महिमा मानी जाती है, वैसे भी हिन्दू धर्म में पीले रंग को बहुत उच्च स्थान दिया गया हैं फिर चाहे वो पीली हल्दी को माथे पर तिलक के रूप में सजाकर हो या सभी पूजन कार्य में यहाँ तक कि बिना पीले (हल्दी के) रंग के ना दाम्पत्य जीवन पूर्ण होता है और न हमारा भोजन, बिना हल्दी के रसोई की कल्पना भी कठिन हो जाती है,  इतना बड़ा योगदान है पीले रंग का और इस पीले रंग या कहें पीत वर्ण को ही पूजा जाता है वसंत पंचमी (Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna) के शुभ पावन पवित्र त्यौहार पर चाहे खाने के रूप में चाहे पूजने के रूप में और वस्त्रों के माध्यम से भी.

Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna

Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna-वसंत पंचमी माँ सरस्वती की आराधना करने का पर्व

 

इस साल बसतं पंचमी का दिन दिनांक व मुहूर्त | Vasant Panchmi Muhurat

इस साल बसंत पंचमी 16 (सोलह) फरवरी 2021 दिन मंगलवार को अत्यधिक शुभ रेवती नक्षत्र में मनायी जाएगी. बसंत पंचमी पूजन के लिए शुभ समय की अवधी लगभग 6 घंटे रहेगी, जो कि सुबह (प्रातः) 7 बजे से लेकर दोपहर 12:30 (साढ़े बारह) बजे तक रहेगा. इस समय के दौरान पूजन करने से अत्यधिक लाभ की की स्थिति उत्पन्न हो रही है.

पूरा वर्ष या साल भारत की नजर से | Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna

हिन्दू संस्कृति कह लो या ज्ञान व धर्म से जुडी बात कर लों सब कुछ शास्त्र संवत ही चलता है हमारी भारतीय परंपरा में, शास्त्रों से ही हमें जानकारियां मिली है मौसम के बारे में, हमारें शास्त्रों में वर्णित है कि किस प्रकार से हमारे पूर्वजों  (अग्रजनों) ने पोराणीक काल से ही सम्पूर्ण वर्ष को (पूरे साल को) छह ऋतुओं (मौसम को) में विभक्त किया हुआ है उन्ही में से एक बहुत ही महतवपूर्ण ऋतु है वसंत ऋतु जिसमे आता है ये महँ पर्व वसंत पंचमी (Basant Panchami 2021), वैसे किसी एक ऋतु को महत्वपूर्ण कहना थोडा सा गलत है क्योंकि सारी ऋतु ही अपना एक विशेष व अति महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं हमारी भारतीय परंपरा में. बसंत पंचमी 16 (सोलह) फरवरी 2021

वसंत पंचमी सरस्वती देवी का जन्म व वसंत ऋतु का अति महत्वपूर्ण स्थान | Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna

वसंत ऋतु को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है और वसंत ऋतु को ऋतुओ का राजा भी कहते हैं, क्योंकि प्रकर्ति कुछ खेल ही ऐसा रचती है मन को मोह लेने वाला. वसंत पंचमी के समय एक उर्जा की बहार (बयार) सी आ जाती है फिर चाहे वो खेत खलिहान हो या मानव शरीर. धरा मानों धानी चुनरियाँ ओढ़ के पीत की छठा बिखेरती है. सरसों से लह लहाते खेत हो या पुष्पों से लधे वृक्ष.

वसंत पंचमी कविता-वसंत ऋतू कविता (Vasant Panchmi Aur Vasant Ritu Kavita)

Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna-वसंत पंचमी-बसंत ऋतू कविता-ऋतु आये ऋतु जाये जीवन में ये बहार लाए

Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna-वसंत पंचमी-बसंत ऋतू कविता-ऋतु आये ऋतु जाये जीवन में ये बहार लाए

खेतों में जहाँ फसलें लह लहाने लगती हैं, पेड़ों को नई कोपलें फूटने लगती हैं नये फल के आगमन की तैयारी शुरू हो जाती है, पेड़ मंजर से लद्द जाते हैं और चहुं ओर वातावरण फूलों से अट जाता है. सरसों के पीले फूल जैसे एक जिद्द ठाण लेते हैं धरती माँ को ना दिखने देने की या कहें धरा ही पीत वर्ण होकर खिल उठती है, बड़ा ही अद्भूत समागम होता है वसंत पंचमी के पर्व पर. वसंत पंचमी का त्यौहार शुरवात देता है अलसाई ठंड से निकलने की, सूर्य देव लाते है उर्जा का नया संचार और देते है एक विश्वास कि आने वाल दिन गए दिन से बेहतर होगा. माघ (माह) महीने के पांचवे दिन पड़ता है बसंत पंचमी का पर्व. शास्त्रों में वसंत पंचमी को ऋषि पंचमी भी कहा गया है इसके पीछे के भी वृतांत उल्लेखित कियें गए हैं.

वसंत पंचमी और माँ सरस्वती एक अद्भूत बेला | Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna Ki Bela 16 February 2021

हिन्दुओं के सारे तीज त्योहारों को प्रभु अर्चना से जोड़ा गया है.  वैसे तो त्योहारों के माध्यम से पूजा अर्चना द्वारा एक पवित्र वातावरण को स्थापित करने की कोशिश की जाती है अपितु अलग अलग त्योहारों पर विशेष देवी देवताओं से जोड़ा भी जाता है.

वसंत पंचमी पर ज्ञान और विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करने का वर्णन है जो पुरे विधि विधान से किया जाता है, माँ सरस्वती क्योंकि विद्या ज्ञान की देवी हैं, तो  विद्या अर्जन कर रहें या विद्या अर्जन की शुरवात करने जा रहें छात्र छात्राओं  का विशेष जुडाव है वसंत पंचमी पर्व से, इस दिन सभी विधार्थी (मानें हर वो इंसान जो कुछ सीख रहा है, और हर कोई तो सीख रहा है चाहे वो किसी भी माध्यम से और यही जीवन है) माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करके माता से अपने सफल जीवन व अधिक से अधिक ज्ञानवान होने की कामना करते हैं, जिस प्रकार विजयादशमी को शौर्य का प्रतीक मान कर सैनिक पूजन करते है उसी प्रकार से विधा अर्जन कर रहे विधार्थी भी अपने सभी साजों सामान कलम किताब आदि की पूजा करके माँ शारदे से प्रार्थना करते हैं.

छात्र जीवन की शुरवात और वसंत पंचमी का पर्व | Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna

अपने छात्र जीवन की शुरवात करने जा रहें नौनिहालों के लिए विशेष महत्त्व का दिन होता है वसंत पंचमी. छोटे छोटे बच्चों को स्कूल भेजने की शुरवात का दिन माना गया है वसंत पंचमी के दिन को, वसंत पंचमी को माँ सरस्वती के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है और शिक्षा की शुरवात के लिए सबसे उत्तम दिन माना गया है.

इसिलिए छोटे छोटे बच्चों को स्कूल भेजने की शुरुआत करके उनके बेहतर कल की कल्पना की जाती है और माता से पार्थना की जाती है –

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

ऋतु राज माह में आने वाली वसंत पंचमी के बारे में कथाएँ | Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna

कुछ पौराणिक ग्रंथो के अनुसार जीवन युग के प्रारंभ में भगवान शिव की आज्ञानुसार ब्रम्हा जी ने स्रष्टि की रचना की लेकिन रचना करके खुश नहीं हुए उन्हें इसमें कुछ खामिया नजर आती थी जिसके कारण से एक अजीब सी निराशा रहने लगी थी तब ब्रम्हा जी ने भगवान विष्णु की उपासना की, उपासना से खुश होकर भगवन विष्णु प्रकट हुए और दोनों में स्रष्टि की निराशा को लेकर गहण चिंतन मनन हुआ, ब्रह्मा जी का पूर्ण वृतांत सुनने के बाद  इस समस्या का निदान करने के लिए भगवान विष्णु ने आदि शक्ति दुर्गा का आव्हान किया.

भगवान विष्णु का आह्वान सुनकर माता तुरंत प्रकट हो गई और विष्णु जी से आह्वाहन का कारण जानकर समस्या का निराकरण करने के लिए आदिशक्ति दुर्गा के शरीर से एक तेज निकला जो दिव्य नारी के रूप में परिवर्तित हो गया. यह दिव्य अद्भूत रूप जिसके एक हाथ में वीणा व दुसरे में वर मुद्रा थे. बाकी के अन्य हाथों में किताब व माला थे. माता ने दुर्गा के शरीर से उत्पन्न होते ही वीणा का मधुर वादन किया जिससे समस्त जिव जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई.

बहते जल में शोर (कोलाहल) आने लगा, हवा के बहने से भी आवाज उत्पन होने लगी और नीरसता समाप्त हो गई सारी  स्रष्टि में उर्जा का संचार करे देने वाली देवी को माँ सरस्वती कहा गया और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माना गया. इसी दिन वसंत पंचमी व माँ सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में जाना जाता है.

ऐसी अनेकों अनेक कथाएँ हमारे शास्त्रों में निहित है व सारें वृतांत विस्तार से उल्लेखित किये गयें हैं.

वसंत पंचमी से जुडी एक अन्य कथा | वसंत ऋतू | Vasant Panchami 16 February 2021

त्रेता युग में जब रावण माता सीता का हरण कर लेता है और भगवान श्री राम माता की खोज में दक्षिण दिशा की ओर निकलते है तो रास्ते में  एक दण्डकारणय नाम का एक स्थान भी आता जहाँ शबरी नाम की एक भीलनी रहती थी. जब प्रभु श्री राम भीलनी से मिले तो वह इतनी प्रसन्न हुई की अपना आपा की खो बैठी और भगवान श्री राम को अपने जूठे चखे हुए बेर खिलाने लगी. प्रेम से ओत प्रोत यह जूठे बेरों वाली बात हम सभी बचपन से अपने दादा नानी से किस्से कहानियों में सुनते हुए ही बड़े हुए हैं. माना जाता है कि जिस दिन यह घटना घटित हुई वह दिन भी वसंत पंचमी (Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna) का ही दिन था. यह दण्डकारणय का क्षेत्र मध्य प्रदेश व गुजरात के बीच में फैला हुआ क्षेत्र है और अब वहाँ माता शबरी का एक भव्य मंदिर भी है.

वसंत पंचमी इतिहास और ऐतिहासिक सरोकार | Vasant Panchami 16 February 2021

बहुत सारी ऐसी घटनाएं वसंत पंचमी (Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna) के दिन घटित हुई हैं जिनकों प्रमुख रूप से यहाँ बताया जा सकता है जिन्होंने हमारी विरासत और संस्कृति को आगे बढ़ाने का ही काम किया है फिर चाहे वो महान योद्धा प्रथ्वीराज चौहान व हमलावर गौरी के बीच की घटना क्यों न हो जब अपने आँखों की रोशनी छीन जाने के बाद भी किस तरह अपने मित्र एवं भाट चंदबरदाई द्वारा कहें शब्दों के अनुसार सटीक निशाना लगाकर गौरी को मौत के घाट उतार दिया था. वह दिन भी वसंत पंचमी (Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna) का ही महान व पूजनीय दिन था.

क्या कहा था चंदबरदाई ने ?

चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ठ प्रमाण

ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान

सिख कौम जो बहुत बहादुर लडाका कौम भी मानी जाती रही है और अपनी गुरु परम्परा को शिद्दत से निभाती है के लिए भी अति महत्वपूर्ण दिन होता है वसंत पंचमी का, इस दिन सिखों के दसवे गुरु गुरु गोविन्द सिंह जी विवाह हुआ था.

ऐसी कितनी ही महत्त्व पूर्ण धटनाओं व एतिहासिकता से भरा हुआ है बसंत पंचमी के दिन का इतिहास जो समूचे तौर पर लिख पाना भी शायद ही संभव हो. फिर चाहे वो रजा भोज का जन्म हो या हिन्दी साहित्य की अमर विभूति सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला का जन्म दिवस.

बसंत ऋतू के माह में पड़ने वाले अन्य महत्वपूर्ण तीज-त्यौहार | Vasant Panchami 16 February 2021

  • तिल चतुर्थी : इस दिन को संकट चौथ भी कहा जाता है और मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पूरे साल में आने वाली चतुर्थी तिथि को व्रत रखने का फल मिल जाता है.
  • शष्ठिला या षटतिला एकादशी : इस एकादशी के दिन व्रत रखने से दुर्भाग्य का नाश होता है व दरिद्रता रुपी कष्टों का निवारण होता है. इस दिन तिल का दान करने का बड़ा माहत्म्य होता है. जो विवाहित लोग जोडें से व्रत रखकर पूजा ध्यान करते है उनका दाम्पत्य जीवन खुशियों से भर जाता है, महिलओं को इस व्रत के रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
  • मौनी अमावस्या : इस दिन जप तप व दान का विशेष महत्त्व होता है और नदियों में स्नान करने का विधान है, मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का भी बहुत अधिक माहत्म्य माना गया है.
  • गणेश जयंती : माघ माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जयंती का उत्सव मनाया जाता है, इस दिन को माघी गणेश चतुर्थी, माघ विनायक चतुर्थी या तिलकुंड चतुर्थी भी कहते हैं.
  • बसंत पंचमी 
  • नर्मदा जयंती  : इस दिन को सम्पूर्ण मध्य प्रदेश में  नर्मदा नदी के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है व नर्मदा माता की पूजा अर्चना की जाती है माना जाता है कि इस दिन नर्मदा नदी का जन्म हुआ.
  • भानु सप्तमी : किसी भी माह के रविवार के दिन पड़ने वाली सप्तमी को भानु सप्तमी के रूप में मनाया जाता है व भगवान सूर्य की उपासना की जाती है, इस दिन सूर्य को जल चढाने से विशेष लाभ की विदान है.
  • जया एकादशी : पुरे साल में 24 एकादशी आती है और कभी कभी अधिकमास या मल मास के हो जाने से इनकी संख्या 26 हो जाती है, सभी एकादशी को पुण्यदायी माना गया है, जया एकादशी के दन व्रत रखने वालों को नीच व  भूत पिशाच योनी से मुक्ति का विदान माना गया है. माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं.
  • विजया एकादशी : विजया एकादशी का व्रत रखने से शत्रु पर विजया मिलती है.
  • शबरी जन्म : इस दिन माता शबरी ने भगवन श्री राम द्वारा गति प्राप्त की थी इसिलिए इस दिन को शबरी जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है.
  • महाशिवरात्रि पर्व:  महाशिवरात्रि महा पर्व भी इसी बेला में शामिल हो जाने वाला पर्व है, इस साल 11 मार्च 2021 दिन गुरुवार को मनाया जायेगा.

बसंत पंचमी पर पतंग उड़ाने का चलन | Vasant Panchmi 16 February 2021

जिस तरह मकर संक्रांति के दिन पतंगे उड़ाई जाती है और मिल बाटकर खाने की परंपरा होती है खासकर जयपुर शहर में तो आसमान पतंगों से भर जाता है ठीक उसी प्रकार दिल्ली व दिल्ली से लगे समूचे क्षेत्र चाहे वह पंजाब हो या हरियाणा या फिर पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ मुजफरनगर सभी स्थानों पर पतंग पतंगे उड़ाकर बसंत पंचमी का उत्सव मनाया जाता है.

 

खाने की द्रस्टी से वसंत पंचमी त्यौहार | क्या खाते है बसंत पंचमी वाले दिन?

इस दिन (Vasant Panchami 16 February 2021) ज्यादातर घरों में पीला खाना ही बनाया जाता है, फिर चाहे वह पीले चावल हो या अन्य कोई पीला भोजन बनाकर माँ सरस्वती (Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna) को भोग लगाने के पशचात प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण किया जाता है. हम आज पीले चावल बनायेंगे जिनकों आप मीठा व नमकीन दोनो तरीकों से बना सकते है.

पीले चावल बनाने की विधि | वसंत पंचमी व पीले चावल की पूजा |Basant Panchmi 16 February 2021

वसंत पंचमी के पवन पर्व पर मुख्यतः पीला भोजन ही बनाया जाता है चाहे मीठे के रूप में या नमकीन के. इस दिन मोती चूर के पीले लड्डू का प्रसाद भी बनाया जाता है. अलग अलग प्रदेशों व स्थान के अनुसार प्रसाद बनाया जाता है लेकिन पीला रंग सभी जगह प्रमुख रूप से शामिल किया जाता है.

बसंत पंचमी पर पीले चावल बनाने के लिए सामग्री | Basant Panchmi Par Peele Chawal Bnane Ke Liye Samagri

  • चावल – 1 कप (लगभग 200 ग्राम)
  • पानी – 4 से 5 कप
  • घी – 50 ग्राम
  • चीनी – 1.5 कप
  • हल्दी – 1 छोटी चम्मच
  • बादाम – 6-7 बादाम
  • किशमिश – 15-20 दानें
  • इलायची – 4 दानें
पीले चावल बनाने की विधि | Vasant Panchmi Par Peele Chawal Banane Ki Vidhi

सबसे पहले चावल को पानी से धोकर 10 से 15 मिनट तक भिगोकर रख देते हैं, इस दौरान बादाम को बारीक बारीक काट लें व किशमिश को छीलकर दानें अलग अलग करें. चीनी को पानी में उबालकर एक तार की चाशनी जैसा घोल तैयार करें.

एक भगोने में चावल को पानी डालकर उबालने के लिए रख व हल्दी भी घोल दें, जब चावल दो तिहाई पक जाये तो आंच से उतर लें व अतिरिक्त पानी को छानकर अलग कर दें.

एक भरी तलें के बर्तन में घी डालकर गर्म करे व बादाम इलायची व किशमिश डालकर बहुत हल्का सा भूने, चावल डालें व तैयार मीठी चाशनी ऊपर से डालें व 10 मिनट बिल्कुल धीमी आंच पर ढककर पकायें. ढक्कन खोले पीले चावल भोग लगाने के लिए तैयार हैं, माता को भोग अर्पित करें व प्रसाद ग्रहण करें व अन्य लोगों में भी बाटें.

Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna-वसंत पंचमी-बसंत ऋतू-पीले चावल प्रसाद व खाने के लिए तैयार

Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna-वसंत पंचमी-बसंत ऋतू-पीले चावल प्रसाद व खाने के लिए तैयार

Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna-वसंत पंचमी-बसंत ऋतू- गुड वाले पीले चावल प्रसाद व खाने के लिए तैयार

Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna-वसंत पंचमी-बसंत ऋतू- गुड वाले पीले चावल प्रसाद व खाने के लिए तैयार

सुझाव :

पीले चावल गुड से भी बनाये जा सकते है बस चीनी की जगह गुड को फिट कर दें, हल्दी की जगह खाने वाले पीले रंग का भी उपयोंग किया जा सकता है.

19 thoughts on “वसंत पंचमी का क्या है महत्व ? मुहूर्त व पर्व मनाने के तौर तरीकें”

  1. Pingback: Vasant Panchmi Aur Vasant Ritu वसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है ? पूरी जानकारी

  2. विस्तृत जानकारी एक छोटे से लेख के माध्यम से, गागर में सागर वाली कहावत चरितार्थ कर दी आपने, बिहारी सत्सई जी के बारे में कहीं गई वो बात ” सत्सईया के दोहरे जैसे नाविक के तीर, देखन में छोटे लगे घाव करे गंभीर, शत प्रतिशत आपके लेखों के बारे में सत्य है।

    1. राजीव जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद व आभार कि आपने लेख का इनता गहण विशलेषण किया, आपके कहें शब्द मेरे लिए अमूल्य धरोहर के समान है जो मैं हमेशा सहेज के रखना चाहूँगा. मेरा हमेशा यही प्रयास रहेगा कि मैं शब्दों के माध्यम से आपकी कसोटी पर खरा उतरूं और इसी प्रकार से आगे भी आपको विस्तृत जानकारी देता रहूँ. नमस्कार

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वसंत पंचमी का क्या है महत्व ? मुहूर्त व पर्व मनाने के तौर तरीकें

Vasant Panchmi Ma Saraswati Ki Aaradhna वसंत पंचमी बसंत ऋतू में खिले हुएं सरसों के फूल