भिण्डी (Bhindi Ki Sabji) एक गर्मी के मौसम की सब्जी है जो बेहद स्वादिस्ट व फादेमंद होती है, वैसे अब भिन्डी (Bhindi Ki Sabji) बारह महीने उपलब्ध रहती है लेकिन आयुर्वेद की मानें तो भिन्डी की सब्जी केवल गर्मियों के मौसम में ही खायी जाने वाली सब्जी है क्योंकि माना जाता है कि स्वभाव से भिन्डी ठण्डी होती है व पेट की अतिरिक्त गर्मी को शांत करने वाली है.

अतः सर्दियों के मौसम में जब हमें गर्म पदार्थों की आवशयकता होती है उस समय भिन्डी खाने से उलट परिणाम मिलने की आशंका रहती है तो भी कुछ जीभ लोलुप या कहें स्वाद के वशीभूत प्राणी इसके शानदार स्वाद के कारण इसको हर मौसम में खाना पसंद करते है । भिन्डी की सब्जी (Bhindi Ki Sabji) से मिलने वाले लाभ एवं ओषधीय गुणों के बारे में विस्तार से चर्चा बाद में करेंगे पहले जल्दी से भिन्डी की सब्जी बना कर खा लेते हैं.

भिन्डी की सब्जी (Bhindi Ki Sabji) बनाने के लिए सामग्री

  • भिन्डी – 500 ग्राम
  • प्याज – 2 मध्यम आकार के
  • हरी मिर्च – 2
  • जीरा पाउडर – आधा छोटी चम्मच
  • सूखा धनिया पाउडर – दो छोटी चम्मच
  • लाल मिर्च पाउडर – आधा छोटी चम्मच
  • हल्दी पाउडर – आधा छोटी चम्मच
  • अजवायन दाना– आधा छोटी चम्मच
  • अमचूर पाउडर – दो छोटी चम्मच
  • नमक – स्वादनुसार
  • सरसों का तेल – 2 से 3 टेबल स्पून (50 से 60 ग्राम)

भिन्डी की सब्जी बनाने की विधि | Bhindi Do Pyaza

भिन्डी की सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले प्याज को छीलकर बारीक कटें, हरी मिर्च को बारीक काट लें, भिन्डी को अच्छे से धोकर डंटल अलग करके किसी सूती कपडे से अच्छे से पोंछ लें या थोड़ी देर पंखे के नीचे रखकर पानी को सूखा लें और  छोटे छोटे टुकड़ों में काट कर रखें.

भिन्डी की सब्जी का छोंक (तड़का) | Bhindi Ki Sabji | Bhindi Do Pyaza

एक लें व उसमे सरसों का तेल डालकर आंच पर गर्म होने के लिए रख दें जव तेल से धुना निकलने लगे तो आंच को कुछ समय के लिए बंद कर दें. तेल को थोडा हिलाए डुलाये ताकि सामान्य तापमान पर आ जाये नहीं तो हमारे मसाले जल सकते हैं.

अजवायन डालकर चटकायें व कटे प्याज व हरी मिर्च डालकर आंच को मीडियम फ्लेम पर चालू कर दें. प्याज को अच्छे से सुनहरा होने तक भूने, हल्दी पाउडर, मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर डालकर हल्का भूने और काटकर राखी भिन्डी मसालें में मिला दें, ऊपर से नमक को छिड़कते हुए डालें व पलटे से मिलकर ढककर पकने के लिए छोड़ दें,

आंच को मीडियम ही रहने दें, अगर आपकी कढ़ाई का टला हल्का है तो आंच को थोडा ओर कम कर दें, 5 मिनट तक पकने के बाद उघाड़कर भिन्डी की सब्जी को अलट पलट कर दें और भिन्डी को दबाकर देखें अगर पक चुकी है तो अमचूर पाउडर बुरके व मिलायें, दो मिनट तक पकाएं बीच बीच में चलाते रहिएँ भिन्डी की सब्जी बनकर तैयार हैं,

भिन्डी की सब्जी को आप पूरी पराठों व रोटी के साथ बड़े शौक से खा सकते है बड़ी लाजवाब लगती है, भिन्डी की सब्जी सफ़र का व टिफिन का भी बड़ा अच्छा साथी है, परिवार के साथ व दोस्तों के साथ चटकारा लें.

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भिन्डी की सब्जी के लिए सुझाव | Bhindi Sabzi | Bhindi Recipe
  1. अगर बिना अजवायन के भिन्डी की सब्जी बनानी है तो आप लहसुन डालकर भी बना सकते है, लहसुन के साथ बिना अजवायन के भी भिन्डी की सब्जी बनायी जा सकती है, भारत के कई हिस्सों में भिन्डी को अजवायन व कई हिस्सों में लहसुन के साथ पकाया जाता है. जब आप लहसुन का इस्तेमाल करें तो लहसुन को छीलकर बारीक काट लें व जीरा डालकर तुरंत लहसुन डालकर सुनहरा होने तक भूने व आगे की परिक्रिया उपरोक्त ही अपना लें, लहसुन के साथ प्याज भी वैकल्पिक रहेगा चाहे तो डालें या न डालें.
  2. दरअसल भिन्डी ठण्डी तासीर व वायु रोगों को प्रोत्साहन देने वाली सब्जी मानी जाती है इसिलिए इसको बनाते समय अजवायन या लहसुन का प्रयोग किया जाता है जो बेहद अनिवार्य है.
भिन्डी के विशेष गुण धर्म, फायदें व नुकसान | Punjabi Bhindi Masala | Benefits of Bhindi Sabzi | Okra Benefits

भिन्डी के पेड़ की लम्बाई अमूमन 1 से 1.5 मीटर तक । बनारस में भिन्डी को ‘राम तरोई’ कहते हैं और छत्तीसगढ में इसे ‘रामकलीय’ कहते हैं। बंगला में स्वनाम ख्यात फलशाक, मराठी में ‘भेंडी’, गुजराती में ‘भींडा’, फारसी में ‘वामिया’ कहते हैं.

शांत चित भिन्डी पेट को ठंडक व आतों को बल देने वाली होती है, भिन्डी का सुबह के समय खाली पेट कच्ची चबाकर खाया जाना बहुत सारे रोगों को समाप्त करने वाला व बेहद हितकारी माना जाता है. ताजा 1 से 2  भिन्डी प्रतिदिन खाने से श्वेतप्रदर, नंपुसकता जैसे रोगों का निवारण करती है.

  1. भिन्डी में विटामिन ए, बी, सी इत्यादि की मात्रा बहुतायत में होती है, भिन्डी प्रोटीन कैल्शियम  और अन्य बहुत सारे खनिज लवणों का एक अच्छा स्रोत है.
  2. भिन्डी पेट की गैस को शांत करती है व बड़ी आंत को बल प्रदान करती है जिससे पेट में होने वाली अनावश्यक जलन व ऐठन में फायदा मिलता है व समस्या से निजात.
  3. भिन्डी मूत्र रोगों को भी नष्ठ करके पेशाब मार्ग की जलन को शांत करती है
  4. भिन्डी से निकलने वाला लसलसा चिकना पदार्थ गले एवं पेट दोनों के लिए लाभकारी होता है.
  5. महिलाओं में होने वाले बहुत सारे रोगों जैसे ल्यूकोरिया इत्यादि में भी भिन्डी का काढ़ा बनाकर पीने से फायेदा मिलता है.
  6. भिन्डी में विटामिन बी प्रचूर मात्रा में होता है, गर्भ को धारण करने से लेकर उसके विकास में मदद करती है और जन्म से जुड़े रोगों को नष्ट करके लाभ देती है.
  7. डायबिटीज के रोगियों को भी भिन्डी लाभ देने वाली मानी जाती है इसमें पाये जाने वाले फाइबर (रेशे) शरीर के अन्दर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखती है.
  8. भिन्डी में विटामिन सी बहुत अच्छी मात्रा में होता है जो हमारे श्वसन तंत्र को दुरुस्त रखता है.
  9. भिन्डी के  उपयोग से त्वचा में निखर आता है और त्वचा मुलायम हो जाती है.
  10. भिन्डी का सेवन पाचन तंत्र को बेहतर बनाकर बहुत सारी पेट की समस्याओं का निराकरण करता है, यही तक कि कुछ कैंसर के रोगों में भी मदद मिलती है.

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