संस्कृत नाम गुड (Benefits of Eating Jaggery) जिसका शाब्दिक अर्थ ‘गेंद’ है जी  हाँ हम बात कर रहे है खाने वाले सवादिष्ट मीठे गुड की जिसका जितना बखान करों कम ही है, गुड यानि गुणों से भरा हुआ गुड यानि स्वभाव से मीठा व हर प्रकार से हितकारी.

बहुत सारे मीठे व्यंजनों में उपयोग होने वाला गुड शुभता का भी प्रतीक माना जाता है, ऐसा शायद ही कोई तीज त्यौहार हो जब गुड का प्रयोग न किया जाता हो, फिर चाहे मक्का की रोटी का चूरमा हो या होली दीवाली पर बनने वाला चूरमा, पूड़े हो, मीठी पूरी हो, लड्डू या मीठी खीर.

शरीर को उर्जा व स्वास्थ्य प्रदान करने वाला अद्भूत खाद्य पदार्थ है गुड, गुड बनाने की विधि (Benefits of Eating Jaggery) की बात करे तो गुड को हम कई सारे रसों को उबालकर कर पकाते हुए सूखा कर बनाते है.

वैसे तो गुड ईख, ताड, खजूर इत्यादि के रस को पकाकर बनाया जाता है, लेकिन सबसे अधिक गुड बनाये जाने वाले रस की बात की जाये तो ईख जिसको गन्ना भी कहते हैं के रस से ही बनाया जाता है, गन्ने को अलग अलग प्रान्तों में भिन्न भिन्न नामों से जाना जाता है,

पश्चिम उत्तर प्रदेश में गन्ने को देसी भाषा में गांडा बोला जाता है, गन्ना (Sugar Cane) या गांडा प्राकर्तिक रूप से ही बहुत मीठा होता है, इसका प्रयोग बहुत सारे तरीकों से किया जाता है, गन्ने के रस से चीनी, खांड, बूरा, शक्कर, राब व सबसे अधिक गुड बनाकर किया जाता है.

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1 गुड के विषय में सामान्य ज्ञान जो होना अनिवार्य है | Benefits of Jaggery | Jaggery Health Benefits

गुड के विषय में सामान्य ज्ञान जो होना अनिवार्य है | Benefits of Jaggery | Jaggery Health Benefits

अगर गुड को प्राकर्तिक तरीकों से बनाया जाये तो गुड का रंग हल्का काला रहता है जो सबसे अधिक स्वादिस्ट व अत्यंत लाभकारी होता है, इसी गुड को बनाने में अगर कुछ अप्रकर्तिक रसायनों का प्रयोग करके इसके रंग को साफ किया जाता है जिससे गुड देखने में तो बेहद खूबसूरत लगने लगता है लेकिन अपने गुणों को कुछ हद तक खो देता है.

आजकल जिन लोगों को खाने की चीजों की ज्यादा समंझ नहीं है वह लोग चमक व दिखने में अच्छा तलाशते हैं लेकिन खाने के उत्तम ज्ञानी इस बात को भली भांति समंझते है कि नेचुरल तरीके से बनाया गया गुड ही स्वास्थ्य के लिए सर्वोतम होता है.

गुड एक ऐसा मीठा पदार्थ है जो खाने वाली सभी मीठी चीजों में सबसे प्रसिद्ध, सुलभ, सस्ता व फायदेमंद है जिसकी तुलना भी अलग अलग तरीकों से अच्छेपन से ही की जाती है.

गुड से सम्बंधित लोकाक्तियाँ | Benefits of Eating Jaggery | गुड बनाने की विधि | Gud Recipe

गुड (Gud Recipe) जैसा स्वभाव होना: हम जब किसी व्यक्ति विशेष के अच्छे मिलनसार स्वभाव का जिक्र करते है तो अनायास ही उसकी तुलना गुड से कर बैठते है, इससे पता चलता है कि गुड (Benefits of Eating Jaggery) हमारे जीवन में जरुरी व अति विशिष्ठ स्थान रखता हैं.

गुड खाये गुल गुलों से परहेज” या “नीम से कडवा एवं गुड से मीठा होना” भी गुड से जुडी अन्य कहावतों के उदहारण हैं, जब कहा जाता है की नीम से कडवा व गुड से मीठा नहीं होना चाहिए तो साधारण शब्दों में हमें यह सिखाया जाता है कि गुड अपने आप में मीठेपन का एक सही पैमाना है यानि गुड से अधिक मीठा होना भी अच्छा नहीं माना जाता है.

गुड का भारत व दुनिया में प्रभाव | Benefits of Eating Jaggery | Jaggery Uses | Jaggery Benefits for Skin

जहाँ तक गुड के उपयोग प्रयोग की बात है तो सारे विश्व में ही इसका उपयोग किया जाता है लेकिन जब दक्षिण एशिया की बात आती है तो गुड का स्थान बहुत ऊपर से ऊपर हो जाता है, भारत में तो इसका उपयोग सबसे अधिक किया जाता है यहाँ तक की मीठे का पर्याय भी गुड को कह सकते है.

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की तरफ अगर नजर दोडायें या देखें तो गुड का व्यापक प्रयोग नजर आता है जहाँ आज भी गुड (Gud Recipe) को चीनी पर वरीयता दी जाती हैं, अब तो मेडिकल साइंस में विश्वाश रखने वाले बड़े बड़े डॉक्टर्स भी चीनी के स्थान पर गुड (गुड बनाने की विधि) का प्रयोग करने की सलाह मुखर रूप से देने लगे हैं जिससे गुड से विमुख हुए लोग भी वापिस गुड की तरफ लौटने लगे हैं.

अंग्रेजी में जैग्री कहें जाने वाले गुड के गुणों को देखते हुए आज बाजारों में गुड की डिमांड बढ़ गयी है जो हमारे किसानों के लिए भी अच्छा है.

गुड के आकार | Jaggery Benefits for Skin | Palm Jaggery Benefits

जैसे हमारे देश में कहावत है कि हमारे यहाँ हर दो चार किलोमीटर पर पानी व भाषा (बोल चाल का तरीका) दोनों बदल जाते है ठीक उसी प्रकार गुड का आकार भी ऐसे ही बदलता है, जैसे कही गुड की छोटी डली (जिनकों खुरपा फाड़ भी कहते हैं) तो कही बड़ी डली, कही चपटी तो कही गोल तो कही बड़ी भेली आदि बनायी जाती हैं

रासायनिक तरीकों से सफाई करके बनाये गुड को आम बोलचाल में मसाले वाला गुड कहते हैं व प्राकर्तिक रूप से सफाई करके बनायें गुड को बिना मसाले वाला गुड बोला जाता है जो मसाले वाले गुड की तुलना में बेहद स्वादिष्ट व लाभकारी होता है.

नया गुड जहाँ चाय बनाने में व अन्य मिठाईयां बनाने में उपयोग किया जाता है वही पुराने गुड की आयुर्वैदिक रूप से  एक अलग  महत्ता हो जाती है जो कई सारी बिमारियों की दवाई बनाने में काम में लिया जाता है.

गुड में पोषक तत्व एवं गुड के फायदे | Benefits of Eating Jaggery | गुड बनाने की विधि | Gud Recipe

गुड में अगर पोषक तत्वों की बात की जायें तो इसमें सर्करा की मात्रा सबसे अधिक होती है बाकि थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, फास्फोरस, आयरन आदि भी पाये जाते है, लोहे की बड़ी बड़ी कडाहीयों में पकने के कारण इसके पोषक तत्व व स्वाद अधिक निखर कर आते हैं

गुड का मौसम या सीजन सर्दियों में अक्तूबर नवम्बर से शुरू होकर मार्च अप्रैल तक समाप्त हो जाता हैं, तासीर में गर्म होने के कारण गुड का उपयोग घरों में सबसे अधिक सर्दियों (ठंड) के मौसम में ही किया जाता है फिर चाहे वह गुड की चाय बनाकर, दूध के साथ, तिल के लड्डू, तिल मूँगफली की चिक्की बनाकर या अन्य भांति भांति की मिठाई बनाकर.

हालाकि गन्ने का रस का या गुड को घोल के बनाये गए बहुत सारे पेय पदार्थों का उपयोग गर्मी में मौसम में भी किया जाता है, माना जाता है कि गुड पानी के साथ घुलकर अपना तासीर बदल लेता है व ठंडा हो जाता है, गर्मियों के तपते मौसम में गन्ने का रस जिससे गुड (Gud Recipe) बनता है को खूब पिया जाता है, गन्ने के रस से खीर इत्यादि अन्य पारम्परिक व्यंजन भी खूब बनाये जाते हैं.

गुड बनाने की विधि | Gud Recipe | गुड के फायदे | Benefits of Jaggery

पहले के समय में (पुराने ज़माने में) लगभग अब से 25 से 30 वर्ष पहले बैलों के द्वारा गन्ने को कोल्हू में पेलकर रस निकाला जाता था व बड़े-बड़े कड़ाहों में रस को पका कर के गुड  (गुड बनाने की विधि) बनाया जाता था, उस समय आज के समय जैसे न तो साधन थे और न ही रसायन जिनसे गुड को साफ कर निखारा जा सके.

पहले कुछ बुजुर्गों द्वारा इजाद की गयी चीजों के द्वारा ही गुड की निखारी (सफाई) की जाती थी, पहले गन्ने के रस को कपडे से छाना जाता था, और फिर चूने आदि से सफाई की जाती थी.

सफाई व निखारने के लिए एक ओर सबसे प्रचलित थी सुख्लाई या जंगली भिन्डी का पेड़ जिसको तोड़ मरोड़ कर पानी में डुबोकर रखा जाता था व मसल कर उसके पानी को उबलते हुए गन्ने के रस में डालकर उसके कालेपन को कम किया जाता था जिससे गुड की सफाई भी होती थी व उसके गुण धर्म भी बरक़रार रहते थे.

लेकिन आज कल तरीके बदल गए है व बैलों की जगह बड़ी बड़ी मशीनों ने ले ली है, तो प्राकर्तिक चीजों की जगह भी कुछ रसायन (Chemicals) आ गए है जिनसे तेजी के साथ काम होता है लेकिन गुड के फायदे भी कही न कही नष्ठ होते हैं.

यधपि कई ऐसे स्थान भी है जहाँ आज भी पुरानी परिपाटी से ही काम लिया जा रहा है और गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाता है, बैलों की जगह तो जरुर मशीन आ गयी है लेकिन चीजें प्राकर्तिक ही उपयोग में ली जा रही हैं.

गुड एक उद्योग |Jaggery Health Benefits | Jaggery for Weight Loss | Jaggery Benefits for Skin | Palm Jaggery Benefits

जब उद्योगों की बात की जाती है तो गुड उद्योग हमारे देश का सबसे पुराना उद्योग माना जाता है,  हमारे यहाँ पहले से ही बहुतायत में इस उद्योग से जुड़े रहें है, अगर कहें कि किसानों द्वारा चलाया जाने वाला पूर्ण रूप से कोई उद्योग है तो वह गुड उद्योग ही है.

अन्य पेड़ों द्वारा बनाये जाने वाले गुड का मौसम (सीजन) अलग अलग होता है जैसे जहाँ भी ताड का वृक्ष बहुतायत में होता वहाँ ग्रीष्म (गर्मी के समय) ऋतु में इसके रस से गुड बनाया जाता है जो अत्यधिक स्वास्थ्यवर्धक होता है.

खजूर से बनने वाला गुड भी बहुत स्वादिस्ट व स्वास्थ्य हितकर होने के साथ सर्दियों में विशेष फायदा पहुचाने वाला होता है, खजूर से बना गुड खनिज पदार्थों से परिपूर्ण होता है, माना जाता है कि खजूर का गुड (Gud Recipe) कोलेस्ट्राल व फेट को सामान्य रखने में मदद करता है, इसमें बहुतायत में खाने वाले रेशें (डाइटरी फाइबर) होते हैं जो बहुत गुणकारी होते हैं.

गुड से होने वाले लाभ | Benefits of Eating Jaggery | Gud Recipe | गुड के फायदे | Benefits of Jaggery | Jaggery Health Benefits | Jaggery for Weight Loss

गुड के बेहद लाभकारी होने के बावजूद बहुत सारे लोग इसके गुणों से अंजान रह जाते हैं व इससे मिलने वाले लाभ से वांछित रह जाते हैं लेकिन अब इसके प्रति लोगों का नजरिया बदल रहा है और लोग वापिस देसी खानपान की तरफ लौट रहें हैं जिनमे से गुड भी एक है.

प्राकर्तिक रूप से मीठा गुड, गाँव देहात में आज भी मिठाई का स्थान रखने वाला गुड, कहावतों में अपनी अलग पहचान रखने वाला गुड मीठे में सबसे ऊँचा स्थान रखता है कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी यह परम सत्य है.

पेट से जुडी बहुत सारी समस्यायों में गुड बेहद फायदेमंद साबित होता है, खाना खाने के बाद गुड की एक छोटी सी डली (15 से 20 ग्राम की) नियमित रूप से सेवन करने से पेट में बनने वाली गैस अपच खट्टी डकार इत्यादि में गुड तुरंत लाभ पहुचाता है.

ठंड लगने पर या सर्दी जुखाम होने पर (Benefits of Eating Jaggery)

ठण्डी के मौसम में जब ठंड सताए तो गुड का आनंद आए, जी हाँ सर्दी होने पर गुड (Benefits of Jaggery) के साथ अदरक, काली मिर्च, लौंग इत्यादि से बना काढ़ा व चाय बहुत लाभ देती है. अदरक या सौठ (सूखी अदरक का पाउडर) के साथ गुड का सेवन करने से गले के रोगों में बहुत फायदा पहुचता है.

जिन लोगों को वायु रोग या वात हो वह गुड को प्रयोग करके बहुत लाभ प्राप्त कर सकते हैं, त्वचा को निखारने में भी गुड बेहद गुणकारी होता है, गुड शरीर से गंदगी साफ करता है जिससे त्वचा में निखार आता है व  युवाओं में होने वाली समस्या मुहासों को ठीक करता है.

गुड आयरन का बहुत अच्छा जरिया | Benefits of Eating Jaggery | Gud Recipe | गुड के फायदे

गुड  (Benefits of Jaggery) आयरन का बहुत अच्छा जरिया माना जाता है जिससे कम खून की परेशानी से लड़ रहे लोगों को लाभ मिलता है, जिन लोगों को बहुत जल्दी थकन महसूस होती है, वह गुड खाकर तुरंत उर्जावान महसूस कर सकते हैं.

भारत के बहुत सारे हिस्सों में जब कोई मेहमान घर में आता है तो पानी के साथ थोडा गुड भी दिया जाता है जो बाहर से आने वाले इंसान को तुरंत एनेर्जी प्रदान करता है. शरीर को उर्जा देने के साथ साथ तापमान को भी नियंत्रित करता है गुड.

महिलाओं के रोग हो या पुरषों के सभी में एक समान रूप से लाभकारी सिद्ध होता है गुड.

गुड और काले तिल को मिलाकर बनने वाले लड्डू शरीर को बलिष्ठ बनाने के साथ अस्थमा को भी ठीक करते हैं.

पीलिया से लेकर स्मरण शक्ति बढ़ाने तक हर तरह से काम में लिया जाता है गुड. आज के आधुनिक चका चौंध वाले समय में जब मूड जल्दी जल्दी स्विंग होता है तो लोग चोकलेट की तरफ भागते हैं जबकि मूड को ठीक करने में गुड बहुत बढ़िया काम करता है.

गुड एक तरफ जहाँ भूख को बढाता है तो वही दूसरी तरफ वजन को कम करने के काम भी आता है बस थोडा तरीका बदलने मात्र से दोनों कामों को बखूबी करता है गुड.

गुड की पैदावार एवं बाजार | Benefits of Eating Jaggery

उत्त्तर प्रदेश को गुड (Benefits of Jaggery) का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है जहाँ मुज़फरनगर, हापुड़ में गुड की सबसे बड़ी मंडियां है जहाँ रोजाना बहुत बड़े स्तर पर गुड की आवक होती है और अलग अलग दुसरे स्थानों के लिए यहाँ से गुड ले जाया जाता है.

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